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जयपाल का कोई मंदिर या मजार नहीं है। 2024
Spread the loveजयपाल का कोई मंदिर या मजार नहीं है। जयपाल की कहानी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के साथ उसके संघर्ष और आत्मसमर्पण की है, जिसमें जयपाल ने अपनी जादूगरी और गलत रास्ते को छोड़कर ख्वाजा साहब की शिक्षा और सेवा के मार्ग को अपनाया। अजमेर शरीफ की दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की स्मृति में बनी…

जादूगर जयपाल का अब क्या हुआ: 2024
Spread the loveजादूगर जयपाल का अब क्या हुआ आत्मसमर्पण के बाद की ज़िंदगी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद, जयपाल ने अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया। उसने जादू और तंत्र-मंत्र को छोड़ दिया और एक साधारण, सच्चे और ईमानदार जीवन जीने का संकल्प लिया। ख्वाजा साहब की शिक्षा और…

अजमेर शरीफ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और जादूगर जयपाल की कहानी :2024
Spread the loveअजमेर शरीफ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और जादूगर जयपाल की कहानी प्रारंभिक जीवन और आगमन अजमेर शरीफ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म 1142 ईस्वी में सिस्तान (वर्तमान ईरान) के चिश्त गाँव में हुआ था। बचपन से ही वे धार्मिक और आध्यात्मिक स्वभाव के थे। एक दिन, उनके पिता का देहांत हो…




